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Wednesday, March 16, 2011

अखरोट है खोजी पत्रकारिता : ऋषि पांडे

खोजी पत्रकारिता एक अखरोट की तरह है जिसको तोड़ने में तो काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है , लेकिन वह काफी स्वादिस्ट और ताकतवर होता है ये कहना है समरघोस समाचार पत्र के स्थानीय संपादक ऋषि पांडे का । वे चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की कार्यशाला के ८ वें दिन मुख्य अतिथि के तोर पर आये थे ।
उन्होंने कहा की खोजी पत्रकारिता में अपराध जगत के छुपे हुए रहस्यों को उजागर करना होता है । सच को बेनकाब करना होता है । उनके अनुसार अच्छे संवाददाता के पास समाचार अपने आप चलकर आते हैं । छोटे से छोटा सौर्स बड़ी से बड़ी सुचना दे सकता है ।
पांडे जी ने कहा की दुनिया में ऐसाकोई कागज नहीं है जिसकी फोटो स्टेट न की जा सकती हो । उन्होंने कहा की या तो इतने बड़े बन जाओ कि इंडस्ट्री को अपने अनुसार ढाल सको या फिर इसके अनुसार खुद ढल जाओ । उन्होंने मीडिया के विद्यार्थिओं को बताया कि उमा खुराना के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ये फेसला सुनाया कि स्टिंग ओपरेशन केवल संपादक की देखरेख में ही हो सकता है ।
इसका संचालन विभागाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह चौहान ने किया । इस मौके पर प्राध्यापक विकास सहारन , कृष्ण कुमार , सन्नी गुप्ता , राम मेहर और विद्यार्थी उपस्थित थे ।

Friday, March 11, 2011

लक्ष्य पर हो नजर : ओमप्रकाश

चौधरी देवीलाल विश्वविधालय के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग की प्रिंट एवं मीडिया की १५ दिवसीय कार्यशाला में त्रिवेणी के सचिव श्री ओमप्रकाश बच्चों से रूबरू हुए । उन्होंने कहा कि हमें पता होना चाहिए कि हमारा लक्ष्य क्या है ? ,हमें हर बुरी चीज में भी सकारात्मक चीज निकाल लेनी चाहिए ।
इसका संचालन पत्रकारिता एवं जनसंचार विभागाध्यक्ष श्री वीरेंद्र चौहान ने किया । ओमप्रकाश जी ने कहा कि नकारात्मकता के बिना सकारात्मकता के कोई मायने नहीं है । उन्होंने बताया कि हम यदि अपना सब कुछ लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए लगा देते है तो जिसे हम असफलता मान रहे होते है वो भी सफलता के लिए आवश्यक होता है ।
उन्होंने कहा कि हमें सबसे पहले अपने आप से प्यार करना होगा ,अपने रोम रोम से मोहबत करनी होगी और अपना होना ही अच्छा लगना चाहिए । मान अपमान के बारे में उन्होंने कहा कि हमारी मर्जी के बिना कोई हमारा मान अपमान नहीं कर सकता है । सुख और दुःख हमारी अपनी भावना पर निर्भर करता है ।
उन्होंने कहा कि हमारे पास कुछ न होना ही अपने आप में भुत कुछ है । हमारे पास यदि बहुत कुछ होता तो हम एक रेंगने वाले कीड़े के समान ही होते ।
इस अवसर पर प्राध्यापक कृष्ण कुमार , विकास सहारन ,सन्नी गुप्ता ,राम मेहर ,पूनम कालेरा ,विभाग की शान बुजुर्ग छात्र रिटायर्ड फोजी श्री बस्तीराम औरविभिन छात्र उपस्थित थे ।

Wednesday, March 9, 2011

माँ

शख्त रास्तों में भी आसान सफर लगता है
ये मुझे माँ की दुआओं का असर लगता है
इक मुद्दत से मेरी माँ नहीं सोई जब मेने इक बार कहा था
माँ मुझे डर लगता है
जब टूटने लगे होसले तो ये यादरखना
बिन मेहनत के हासिल वो ताज नहीं होते
अँधेरे में भी ढूंड लेते हैं मंजिल अपनी
जुगनूँ कभी रौशनी के मोहताज नहीं होते

१५ दिवसीय कार्यशाला

समाचार पत्रों की वेब साईट और वेब पोर्टल
१ ट्रिब्यून इंडिया डोट कॉम
टाइम्स इंडिया डोट कॉम
पंजाब केसरी डोट कॉम
जागरण डोट कॉम
जनसंचार डोट कॉम
यु एन आई डोट कॉम
रोयटरडोट कॉम
बी बी सी डोट कॉम
पि टी आई डोट कॉम
भास्करडोट कॉम

Tuesday, November 23, 2010

सकारात्मक सोच

हर काम सोच से ही शुरु होता है ।
एक इन्सान सोचता था कि बंद कमरा हवा में उड़ा दूंगा ' तभी तो राइट ब्रदर ने जहाज बनाया ।
एक इन्सान ने सोचा था कि सूरज को कमरे में बंद कर दूंगा 'तो ही थोमस एडिसन ने बल्ब बनाया ।
एक इन्सान पेट्रोल पम्प पर पेट्रोल डालने का काम करता था पेट्रोल डालकर ८ -१० लाख कि गाड़ी पर हाथ रखकर कहता था कि ऐसी गाड़ी मेरी होगी पेट्रोल पम्प कि और हाथ करके कहता था कि ऐसेपेट्रोल पम्प मेरे होंगे तो मालिक बोलता था कि दो जन्म कि नोकरी करेगा लेकिन एक पेट्रोल पम्प नहीं खरीद सकेगा वहअमीरआदमी धीरू भाई अम्बानी था ।

Tuesday, November 2, 2010

पारम्परिक स्वागत होगा ओबामा का

अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा 8 नवम्बर को भारतीय संसद की यात्रा पारम्परिक भारतीय संस्कृति से उनके साक्ष्यात्कारकी तरह होगी । संसद भवन की अतिथि पुस्तिका (गोल्डन बुक ) से लेकर सहायक कर्मचारियों के कपड़ों तक में भारतीय परम्परा और संस्कृति का दीदार किया जा सकेगा। ओबामा 8 नवम्बर की शाम यहाँ करीब 45 मिनट गुजारेंगे। जिसकी तैयारी में संसद भवन की सज धज शुरू हो chuki है।

लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय के अधिकारियोंने बिसनेस बताया कि गोल्डन बुक को महात्मा गांधी जी की याद से जोड़ने के लिए उस पर खाकी का सुन्दर कवर तक चदाया जायेगा। एक सूत्र ने बताया कि कड़ी कवर के डिजाईन का काम चल रहा है। इसका उद्देश्य कड़ी को बढावा देना तो है ही साथ अमेरिकी राष्ट्रपति को गांधी के भारत के आंतरिक हिस्से से रूबरू करवाना भी है। ओबामा को गाँधी के प्रशंसक के रूप में जाना जाता है। लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को अमेरिकी प्रथम दंपत्ति को एक स्मृति चिन्ह भेंट करने की प्रोटोकोल संभंधि स्वीकृति मिल गयी है। बहरहाल एक शानदार तोहफे की खोज अभी भी जारी है। यह परम्परिक भारतीय कला का ऐसा खूबसूरत नमूना होना चाहिए, जो अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय ओवल ऑफिस की शोभा बड़ा सके। ब्रिटिश वास्तुकारों एडविन लूटियंसऔर हर्बट बेकर द्वारा डिजाईन की गई और 1917 में तैयार संसद की इमारत का सौन्द्रयकरण चल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति समेत लोकसभा अध्यक्ष, राज्य सभा के पदेन राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री को सेंट्रल हाल तक ले जाने वाले तमाम हाउस मार्शल समेत सहायक कर्मचारियों को उस दिन के लिए विशेष तौर पर तैयार किये गए नए कपडे पहने हुए होंगे।