Pageviews last month

Tuesday, November 23, 2010

सकारात्मक सोच

हर काम सोच से ही शुरु होता है ।
एक इन्सान सोचता था कि बंद कमरा हवा में उड़ा दूंगा ' तभी तो राइट ब्रदर ने जहाज बनाया ।
एक इन्सान ने सोचा था कि सूरज को कमरे में बंद कर दूंगा 'तो ही थोमस एडिसन ने बल्ब बनाया ।
एक इन्सान पेट्रोल पम्प पर पेट्रोल डालने का काम करता था पेट्रोल डालकर ८ -१० लाख कि गाड़ी पर हाथ रखकर कहता था कि ऐसी गाड़ी मेरी होगी पेट्रोल पम्प कि और हाथ करके कहता था कि ऐसेपेट्रोल पम्प मेरे होंगे तो मालिक बोलता था कि दो जन्म कि नोकरी करेगा लेकिन एक पेट्रोल पम्प नहीं खरीद सकेगा वहअमीरआदमी धीरू भाई अम्बानी था ।

Tuesday, November 2, 2010

पारम्परिक स्वागत होगा ओबामा का

अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा 8 नवम्बर को भारतीय संसद की यात्रा पारम्परिक भारतीय संस्कृति से उनके साक्ष्यात्कारकी तरह होगी । संसद भवन की अतिथि पुस्तिका (गोल्डन बुक ) से लेकर सहायक कर्मचारियों के कपड़ों तक में भारतीय परम्परा और संस्कृति का दीदार किया जा सकेगा। ओबामा 8 नवम्बर की शाम यहाँ करीब 45 मिनट गुजारेंगे। जिसकी तैयारी में संसद भवन की सज धज शुरू हो chuki है।

लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय के अधिकारियोंने बिसनेस बताया कि गोल्डन बुक को महात्मा गांधी जी की याद से जोड़ने के लिए उस पर खाकी का सुन्दर कवर तक चदाया जायेगा। एक सूत्र ने बताया कि कड़ी कवर के डिजाईन का काम चल रहा है। इसका उद्देश्य कड़ी को बढावा देना तो है ही साथ अमेरिकी राष्ट्रपति को गांधी के भारत के आंतरिक हिस्से से रूबरू करवाना भी है। ओबामा को गाँधी के प्रशंसक के रूप में जाना जाता है। लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को अमेरिकी प्रथम दंपत्ति को एक स्मृति चिन्ह भेंट करने की प्रोटोकोल संभंधि स्वीकृति मिल गयी है। बहरहाल एक शानदार तोहफे की खोज अभी भी जारी है। यह परम्परिक भारतीय कला का ऐसा खूबसूरत नमूना होना चाहिए, जो अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय ओवल ऑफिस की शोभा बड़ा सके। ब्रिटिश वास्तुकारों एडविन लूटियंसऔर हर्बट बेकर द्वारा डिजाईन की गई और 1917 में तैयार संसद की इमारत का सौन्द्रयकरण चल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति समेत लोकसभा अध्यक्ष, राज्य सभा के पदेन राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री को सेंट्रल हाल तक ले जाने वाले तमाम हाउस मार्शल समेत सहायक कर्मचारियों को उस दिन के लिए विशेष तौर पर तैयार किये गए नए कपडे पहने हुए होंगे।

Wednesday, October 20, 2010

सफल केसे हों

कुछ मार्ग सफलता की ओर जाते हैं और कुछ विफलता की ओर ।

यदि आप अपना मार्ग विवेक से निर्धारित करे तो आप निश्चय ही सफल हो सकते हैं ।
सुप्रसिद्ध विचारक एवं चरित्र -निर्माण विषय के अधिकारी लेखक स्वेट मार्डेन ने इस तथ्य को उजागर किया

Monday, October 18, 2010

अभय चौटाला लेंगे बैठक

सिरसा/ऐलनाबाद १० अक्तूबर (सुशील/जगदीप/अंकिता) इंडियन नेशनल लोकदल पार्टी की और से ऐलनाबाद के विधायक एवं खेल रत्न अभय सिंह चोटाला अपने निवास स्थान पर १९ अक्तूबर सुबह१० बजे सिरसा हल्के के सभी पदाधिकारी व् कार्यकर्ताओं की मीटिंग लेंगे । इनेलो पार्टी के जिलाध्यक्ष पदम जेन ने बताया की इस मीटिंग का मुख्य उदेश्य पार्टी की और से १ नवम्बर से हो रही गुडगाँव रेली को सफल बनाने के लिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को लेकर आने के ल्लिये कहेंगे । जेन ने लोगों को कहाकी आज का यह त्यौहार धर्म की अधर्म पर जीत का प्रतीक है । उन्होंने आगे कहा की हरियाणा के खिलाडियों ने कोमनवेल्थ खेलों में जो अच्छा प्रदर्शन किया है वे बधाई के पात्र है ।

Monday, October 11, 2010

गरीबों का काल है कोम्न्वेल्थ खेल

खेलों का आयोजन करवाना कोई बुरी बात भी नहीं है क्योंकि खेल रास्ट्रीयभावना और प्रेम प्यार कि भावना को मजबूत करते है लेकिन यदि गरीबों कि दुर्दशा या महंगाई को देखा जाये तो यह उनके लिए एक अभिशाप बन जायेगा । कोमनवेल्थ खेलों का आयोजन करने वालों के घरों में चाहे बेअंदाज पैसा आ जाये लेकिन उन गरीब लोगों कि कोन सुनेगा जिन्हें कोमनवेल्थ खेल के चलते दिल्ली में आने तक कि अनुमति नहीं है इस हाल को देखकर तो मुझे एक शायर कि लाइन याद आ रही है ......
"लोग चढ़ा रहे है मजारों पर चादरें ,
लेकिन किसे खबर कि कोई बेकफन भी हैं" ।
भारत मुनियों और धर्म कि भूमि माना जाता है जहाँ यह सत्य कहते है कि हमें अपनी हेसियत और ओकात में रहकर खर्च करना चाहिए या कि चादर देखकर पैर पसारना चाहिए । तो भारत में कोमनवेल्थ खेलों को आयोजित करने में जितना पैसा बहाया जा रहा है क्या उससे आम आदमी को एक रूपए का भी फायदा हुआ है ?क्या कोई यह प्रावधान है कि कोई एक भी गरीब आदमी उस खेल को देखने कि विशेष छुट मिली है ?.........लेकिन उनके लिए एक तोहफा जरुर दिया गया है , महंगाई का वो फंदा जो कुछ दिन पहले बसों का किराया बढाकर उनके गले में डाला गया था ।
५० करोड़ का वो गुबारा जिसके पैसों को यदि रोडवेज विभाग को दिया होता तो शायद इस परेशानी से तो नहीं जूझना होता । और यदि इन पैसों को शिक्षा विभाग या खेल नर्सरियों को तेयार करने में लगाया जाता तो आने वाले समय में जब भी विश्व में खेल होते तो भारत का स्वर्ण , रजत और कांस्य पदक विजेताओं में पहला स्थान होता ।

Tuesday, October 5, 2010

अयोध्या मामले का फेसला

अयोध्या मामले के फेसले को देखकर मुझे तो यूँ लगता है कि .......
न हिन्दू बुरा है न मुसलमान बुरा है ,
बुराई पर उतर आये तो हर इन्सान बुरा है ।
साठ साल पुराना अयोध्या का राम जन्म भूमि और बाबरी मस्जिद के मामले का फेसला ३० सितम्बर २०१० को ३.३० बजे सुनाया गया । तीन कुर्सी कि अद्यक्ष्ता में येफेसला सुनाया गया कि इस भूमि के तीन भाग किये गये है , जिनमे एक हिस्से पर राम मंदिर और एक हिस्से पर बाबरी मस्जिद तथा तीसरे हिस्सा साधुओं के लिए रखा गया है । वेसे देखा जाये तो अयोध्या कि सारी भूमि राम मंदिर के लिए दी जानी थी लेकिन हर सिक्के के दो पहलू होते है , उसी प्रकार न्यायालय के फेसले को भी मानना जरूरी है । यह बात तो हर शख्स जानताहै ,चाहे वो हिन्दू हो , मुसलमान हो , सिख हो या फिर यूँ इसाई हो कि अयोध्या में भगवान श्री राम का जन्म हुआ था और वो हमारे पूर्वज है जहाँ पर श्रीराम का मंदिर बनाया गया था । लेकिन बाबर ने भारत में आकर राज किया और राममंदिर को तोडकर उस जगह बाबरी मस्जिद का निर्माण करवा दिया तो हिन्दुओं के मन को ठेस पहुंची जिसपर उन्होंने बाबरी मस्जिद को गिरा दिया । अब फेसला आने के बाद भी काफी बवाल मचा हुआ है तो आगे क्या होता है यह तो आने वाला समय ही बतायेगा । मुझे तो यूँ लग रहा है कि .....
"गर्दिशों में घिर गया है देश मेरा इस तरह ,
वीर अभिमन्यु को घेरा था कोरवों ने जिस तरह ।