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Tuesday, July 16, 2013


                                                                        सनसनी सानिया 

                                        कभी -सनसनी ,कभी स्टार , नये -नये दुनिया  देती रहे नाम तुझे,
                                        अद् भुत करतब दिखा नये -नये, ताकि सभी करे सलाम तुझे ,

                                                              लोन टेनिस की जान हो तुम,
                                                              भारत माँ की शान हो तुम,
                                                          
                                        भारत माँ की शान को बहुत  बढाया है तुमने , 
                                        भेदभावों की  कुरीती को दूर भगाया है तुमने , 
                                        सानिया का नाम याद है , हर सख्स की जुबान को , 
                                        सभी की फ़रियाद है , आप छूती रहो आसमान को, 

                                                                  खिलाडी बड़ी महान हो तुम , 
                                                                  हेदराबाद की आन हो तुम ,

                                        सुशील की हर दुआएं भी आपके साथ में हैं , 
                                        भारत माँ की शान भी आपके हाथ में है ,



                                                                     -- सुशील गोयल .,
                                                                       9 7 2 9 1 -1 2 5 4 6 

Wednesday, June 19, 2013

LAKSHY

जब टूटने लगे हौसले तो ये याद रखना ,  कि बिन मेहनत के हासिल वो ताज नही होते ,
       अँधेरे में खोज लेते हैं मंजिल अपनी  , जुगनूँ कभी रौशनी के मोहताज नहीं होते .

दोस्तों ., भागो मत .., जागो .., ये समय भागने का नही है , बल्कि अपने सपनों को साकार करने का समय है .
अपना लक्ष्य निश्चित करो ..और उसे पाने के लिए जुट जाओ . यह कोई महत्वपूर्ण नही है कि आज आप किस स्थान पर हैं महत्वपूर्ण यह ह की कल आप किस जगह पर होंगे ..., सुशील  गोयल   

Tuesday, May 7, 2013

Possitive Attitude...

                         THE WORLD IS YOUR MIRROR 

                                 The world is your mirror and your mind is a magnet.
                                        What you perceive in this world is largely a reflection of your 
                                                own attitudes and beliefs . 
                           Life will give you what you attract with your thoughts.
                               Think , act and talk negatively and your world will be negative.
                                      Think and act and talk with enthusiasm and you will attract positive results.
                                                                                 --Michael Lebeul

Faculty Positions

Manipal University invites applications from eligible candidates for faculty positions at its constituent institutions .
assistent prfessor for various dept.
For mor detail please go on :  Jobs@manipal.edu    Phone : 0820 2922525

Monday, October 3, 2011

ऑनर किलिंग ........

ऑनर किलिंग के मुदे पर कुछ लिखना तो नहीं चाहता , लेकिन युवाओं की जानें जो झूठी शान -शौकत के नाम पर छीनी जा रही है ,उनसे कई बार दिल को गहरी ठेस पहुंच रही है । युवा होने के नाते इस मुदे पर इतना कुछ जरुर लिखना चाहूँगा कि अपने आप को समाज के ठेकेदार मानने वाले उन लोगों को एक बार जरुर इस बात पर विचार कर लेना चाहिए कि जो युवा मोहब्बत करते हैं , इश्क करते है , प्रेम करते हैं , लव करते हैं , इक - दूजे के साथ जीने मरने कि कसमें खाते हैं ,उनकी जान तक ले लेना , बेरहमी से हत्या कर देना क्या जुल्म नहीं है , क्या अत्याचार नहीं हैं , क्या पाप नहीं हैं ? उन लोगों को यह मालूम होना चाहिए कि उनके बच्चे अगर उनकी नजरों में गलत काम कर रहें हैं ,बुरा कदम उठा रहे हैं ,तो उनके द्वारा उठाया गया कदम क्या उन्हें मंदिर ,मस्जिद ,गुरुद्वारे या चर्च कि ओर ले जाता है ?
मैं बार -बार उनको समाज के ठेकेदार तो नहीं कहना चाहता , इसलिए कहना चाहूँगा कि जुल्म के ठेकेदारों को अपनी जिन्दगी के भूतकाल में नजरें डालनी चाहिए कि क्या जिन्दगी में उन्होंने कोई बुरा काम नहीं किया ?,क्या कोई घिनोने कृत्य उन्होंने नहीं किये ? क्या कोई जुल्म नहीं किया ? क्या हुआ अगर उनका पर्दाफाश नहीं हुआ तो क्या वे दंड के भागीदार नहीं हैं ? अगर उनके बच्चे किसी से मोहब्बत करने लगते हैं ,अपनी पूरी जिन्दगी किसी के साथ बिताना चाहते हैं , तो उनका क्या यह फर्ज नहीं बनता कि उनकी ख़ुशी को ही अपनी ख़ुशी समझा जाये ओर अगर प्रेम - मोहब्बत करना जुल्म है ,गुनाह है तो उन्हें अपने बच्चों को उस ग्रन्थ का ,उस पुस्तक का परिचय बचपन से ही करा देना चाहिए जिसके किसी भी पेज कि किसी भी पंक्ति मैं यह जरुर लिखा हो कि '' सची मोहब्बत करना जुल्म है , साचा करना गुनाह है औ र इनके बदले मैं अपनों द्वारा किया गया उनका खून एक पुन्य का काम है , धर्म का काम हैं । ''
युवा पत्रकार होने के नाते यही कहना चाहूँगा कि युवाओं को इस दुनिया कि आबो - हवा मैं मोहब्बत कि , प्रेम कि इतनी खुशबु फेला देनी चाहिए कि उन लोगों कि सांसें भी केवल मोहब्बत कि , प्रेम की खुशबु की एक - एक बूंद के सहारे ही चलें ........
'' जुल्म लाख करें ज़माने वाले ,
पर आबो - हवा की खुशबु न जाएगी ।
लेखक - सुशील गोयल मो०९७२९१-१२५४६

Monday, April 11, 2011

जज्बा ,जोश और जूनून ....

कहते हैं कि अगर जोश , जज्बा और जूनून हो तो इन्सान इस दुनिया में किसी भी मुकाम को पा सकता है । मायने यह नहीं रखता कि हम कितने तेज दोड़ते हैं , मायने यह रखता है कि हमारी दिशा कौनसी है ? आज हर माँ -बाप का सपना होता है कि उनका बेटा या बेटी बहुत बड़े बन जाएँ ,लेकिन जब तक बच्चों का साथ टॉपर के साथ नहीं होगा ,तब तक वे टॉप नहीं कर सकेंगे । असफल लोग हारे हुए और अपने से कमजोर लोगों के साथ बेठ्तें हैं ताकि वे उनले बाप बन सकें ,लेकिन सफल लोग अपने से सफल लोगों के साथ बेठ्तें हैं ताकि वे उनसे कुछ पा सकें ,........

Monday, March 28, 2011

इक बार के मिलने को ....

इक बार के मिलने को वो प्यार समझते है , पागल हैं मगर खुद को होशियार समझते हैं , चाहत की इबादत को जो रोग समझता है , हम ऐसे मसीहा को बीमार समझते हैं , ये ऊँचे घरानों के बिगड़े हुए लडके हैं , जो प्यार के मंदिर को बाजार समझते हैं , इस मुल्क के माथे पर दाग हैं वो 'अंजुम ', जो लोग फसानों को त्यौहार समझते हैं । पागल हैं मगर ................................. ।

किताबों के पन्ने .....

किताबों के पन्ने पलट कर सोचते हैं , यूँ पलट जाये जिन्दगी तो क्या बात है , तमन्ना जो पूरी हो ख्वाबों में , हकीकत बन जाये तो क्या बात है , कुछ लोग मतलब के लिए खोजते है मुझे , बिन मतलब कोई आये तो क्या बात है , क़त्ल कर के तो ले जायेंगे दिल मेरा , कोई बातों से ले जाये तो क्या बात है , जो शरीफों की शराफत में बात न हो , एक शराबी कह जाये तो क्या बात है , जिन्दा रहने तक तो ख़ुशी दूंगा सबको , किसी को मेरी मौत पर ख़ुशी मिल जाये तो क्या बात है ,

Thursday, March 24, 2011

शहीदों की चिताओं पर ------

शहीद होंगे किताबों पर मिट्टी में दफन होगा ,
चिता बनेगी कलमों से कागजों का कफन होगा ।
ये पंक्तियां हमें उन देशभक्ततों की याद दिलाती हैं जो हंसते -हंसते
फांसी के फंदे पर झुल गये थे ।उन देशभक्तों में राजगुरू ,भगतसिंह और सुखदेव आदि थे । भगत सिंह ने अंग्रेज अधिकारियों को कहा था कि वे उन्हें फांसी की बजाए गोली मारें और देखें कि भारतीय किस प्रकार से
अपने आदर्श के लिए मौत का भी खुशी से आलिंगन कर सकते हैं ।
भगत सिंह एक ऐसे का्रंतिकारी थे जो फांसी के समय हंसते हुए कह रहे
थे कि ,मुझे मरने का डर नहीं और इसका मतलब ये भी नहीं कि उन्हें अपनी जिंदगी से नफरत हैं ,उन्हें भी अपनी जिंदगी से प्यार हैं ।
कुछ वो लोग थे जो वक्त के सांचे में ढल गये ,
कुछ लोग वो भी थे जो वक्त के सांचे बदल गये ।

Wednesday, March 23, 2011

पत्रकार आलोक तोमर का निधन

किश्तियां डूब जाती है ,तूफान चलें जाते है।यादें रह जाती हैं ,इंसान चले जाते हैं ।
हिन्दी पत्रकारिता के आधुनिक स्तंभ माने जाने वाले वरिष्ठ पत्रकार, अपनी बेबाक निर्भिक और धारधार पत्रकारिता करने वाले आलोक तोमर अपनी अनोखी लेखन शैली के लिए जाने जाते थे । उनका असमय चले जाना पत्रकारिता जगत के लिए दुःखद घटना है । उन्होनें सिनेमा ,इंटरनेट ,वेबपोर्टल समेत कई क्षेत्रों में काम किया है। 2000 में उन्होनें डेटलाईन इंडिया नामक इंटरनेट न्यूज एजेंसी की स्थापना की । कैंसर से लंबे समय से पीड़ित रहे तोमर का रविवार को दिल का दौरा पड़ने से बाना अस्पताल में निधन हो गया । वे 50 वर्ष के थे । प्रिंट व इलेक्ट्रोनिक मीडिया से जुड़े तोमर ने अपराध और सामाजिक सरोकार के मुद्दों से जुड़ी पत्रकारिता में अपना विशेष योगदान दिया। मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में 1960 में जन्मे तोमर ने हिन्दी पत्रकारिता में धारदार भाषा का नया रुप तैयार किया। वे विपरीत परिस्थितियों में भी काम के लिए जाने जाते रहे। उन्होने कई समाचार पत्रों में अपनी सेवाएं दी। जनसत्ता में अपनी रिपोर्ट के जरिए देश के कोने कोने में चर्चित हुए। वे एक ऐसी महान शख्सियत थे जिन्होंने पत्रकारिता जगत को एक नया आयाम दिया।

Wednesday, March 16, 2011

अखरोट है खोजी पत्रकारिता : ऋषि पांडे

खोजी पत्रकारिता एक अखरोट की तरह है जिसको तोड़ने में तो काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है , लेकिन वह काफी स्वादिस्ट और ताकतवर होता है ये कहना है समरघोस समाचार पत्र के स्थानीय संपादक ऋषि पांडे का । वे चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की कार्यशाला के ८ वें दिन मुख्य अतिथि के तोर पर आये थे ।
उन्होंने कहा की खोजी पत्रकारिता में अपराध जगत के छुपे हुए रहस्यों को उजागर करना होता है । सच को बेनकाब करना होता है । उनके अनुसार अच्छे संवाददाता के पास समाचार अपने आप चलकर आते हैं । छोटे से छोटा सौर्स बड़ी से बड़ी सुचना दे सकता है ।
पांडे जी ने कहा की दुनिया में ऐसाकोई कागज नहीं है जिसकी फोटो स्टेट न की जा सकती हो । उन्होंने कहा की या तो इतने बड़े बन जाओ कि इंडस्ट्री को अपने अनुसार ढाल सको या फिर इसके अनुसार खुद ढल जाओ । उन्होंने मीडिया के विद्यार्थिओं को बताया कि उमा खुराना के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ये फेसला सुनाया कि स्टिंग ओपरेशन केवल संपादक की देखरेख में ही हो सकता है ।
इसका संचालन विभागाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह चौहान ने किया । इस मौके पर प्राध्यापक विकास सहारन , कृष्ण कुमार , सन्नी गुप्ता , राम मेहर और विद्यार्थी उपस्थित थे ।

Friday, March 11, 2011

लक्ष्य पर हो नजर : ओमप्रकाश

चौधरी देवीलाल विश्वविधालय के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग की प्रिंट एवं मीडिया की १५ दिवसीय कार्यशाला में त्रिवेणी के सचिव श्री ओमप्रकाश बच्चों से रूबरू हुए । उन्होंने कहा कि हमें पता होना चाहिए कि हमारा लक्ष्य क्या है ? ,हमें हर बुरी चीज में भी सकारात्मक चीज निकाल लेनी चाहिए ।
इसका संचालन पत्रकारिता एवं जनसंचार विभागाध्यक्ष श्री वीरेंद्र चौहान ने किया । ओमप्रकाश जी ने कहा कि नकारात्मकता के बिना सकारात्मकता के कोई मायने नहीं है । उन्होंने बताया कि हम यदि अपना सब कुछ लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए लगा देते है तो जिसे हम असफलता मान रहे होते है वो भी सफलता के लिए आवश्यक होता है ।
उन्होंने कहा कि हमें सबसे पहले अपने आप से प्यार करना होगा ,अपने रोम रोम से मोहबत करनी होगी और अपना होना ही अच्छा लगना चाहिए । मान अपमान के बारे में उन्होंने कहा कि हमारी मर्जी के बिना कोई हमारा मान अपमान नहीं कर सकता है । सुख और दुःख हमारी अपनी भावना पर निर्भर करता है ।
उन्होंने कहा कि हमारे पास कुछ न होना ही अपने आप में भुत कुछ है । हमारे पास यदि बहुत कुछ होता तो हम एक रेंगने वाले कीड़े के समान ही होते ।
इस अवसर पर प्राध्यापक कृष्ण कुमार , विकास सहारन ,सन्नी गुप्ता ,राम मेहर ,पूनम कालेरा ,विभाग की शान बुजुर्ग छात्र रिटायर्ड फोजी श्री बस्तीराम औरविभिन छात्र उपस्थित थे ।

Wednesday, March 9, 2011

माँ

शख्त रास्तों में भी आसान सफर लगता है
ये मुझे माँ की दुआओं का असर लगता है
इक मुद्दत से मेरी माँ नहीं सोई जब मेने इक बार कहा था
माँ मुझे डर लगता है
जब टूटने लगे होसले तो ये यादरखना
बिन मेहनत के हासिल वो ताज नहीं होते
अँधेरे में भी ढूंड लेते हैं मंजिल अपनी
जुगनूँ कभी रौशनी के मोहताज नहीं होते

१५ दिवसीय कार्यशाला

समाचार पत्रों की वेब साईट और वेब पोर्टल
१ ट्रिब्यून इंडिया डोट कॉम
टाइम्स इंडिया डोट कॉम
पंजाब केसरी डोट कॉम
जागरण डोट कॉम
जनसंचार डोट कॉम
यु एन आई डोट कॉम
रोयटरडोट कॉम
बी बी सी डोट कॉम
पि टी आई डोट कॉम
भास्करडोट कॉम

Tuesday, November 23, 2010

सकारात्मक सोच

हर काम सोच से ही शुरु होता है ।
एक इन्सान सोचता था कि बंद कमरा हवा में उड़ा दूंगा ' तभी तो राइट ब्रदर ने जहाज बनाया ।
एक इन्सान ने सोचा था कि सूरज को कमरे में बंद कर दूंगा 'तो ही थोमस एडिसन ने बल्ब बनाया ।
एक इन्सान पेट्रोल पम्प पर पेट्रोल डालने का काम करता था पेट्रोल डालकर ८ -१० लाख कि गाड़ी पर हाथ रखकर कहता था कि ऐसी गाड़ी मेरी होगी पेट्रोल पम्प कि और हाथ करके कहता था कि ऐसेपेट्रोल पम्प मेरे होंगे तो मालिक बोलता था कि दो जन्म कि नोकरी करेगा लेकिन एक पेट्रोल पम्प नहीं खरीद सकेगा वहअमीरआदमी धीरू भाई अम्बानी था ।

Tuesday, November 2, 2010

पारम्परिक स्वागत होगा ओबामा का

अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा 8 नवम्बर को भारतीय संसद की यात्रा पारम्परिक भारतीय संस्कृति से उनके साक्ष्यात्कारकी तरह होगी । संसद भवन की अतिथि पुस्तिका (गोल्डन बुक ) से लेकर सहायक कर्मचारियों के कपड़ों तक में भारतीय परम्परा और संस्कृति का दीदार किया जा सकेगा। ओबामा 8 नवम्बर की शाम यहाँ करीब 45 मिनट गुजारेंगे। जिसकी तैयारी में संसद भवन की सज धज शुरू हो chuki है।

लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय के अधिकारियोंने बिसनेस बताया कि गोल्डन बुक को महात्मा गांधी जी की याद से जोड़ने के लिए उस पर खाकी का सुन्दर कवर तक चदाया जायेगा। एक सूत्र ने बताया कि कड़ी कवर के डिजाईन का काम चल रहा है। इसका उद्देश्य कड़ी को बढावा देना तो है ही साथ अमेरिकी राष्ट्रपति को गांधी के भारत के आंतरिक हिस्से से रूबरू करवाना भी है। ओबामा को गाँधी के प्रशंसक के रूप में जाना जाता है। लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को अमेरिकी प्रथम दंपत्ति को एक स्मृति चिन्ह भेंट करने की प्रोटोकोल संभंधि स्वीकृति मिल गयी है। बहरहाल एक शानदार तोहफे की खोज अभी भी जारी है। यह परम्परिक भारतीय कला का ऐसा खूबसूरत नमूना होना चाहिए, जो अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय ओवल ऑफिस की शोभा बड़ा सके। ब्रिटिश वास्तुकारों एडविन लूटियंसऔर हर्बट बेकर द्वारा डिजाईन की गई और 1917 में तैयार संसद की इमारत का सौन्द्रयकरण चल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति समेत लोकसभा अध्यक्ष, राज्य सभा के पदेन राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री को सेंट्रल हाल तक ले जाने वाले तमाम हाउस मार्शल समेत सहायक कर्मचारियों को उस दिन के लिए विशेष तौर पर तैयार किये गए नए कपडे पहने हुए होंगे।

Wednesday, October 20, 2010

सफल केसे हों

कुछ मार्ग सफलता की ओर जाते हैं और कुछ विफलता की ओर ।

यदि आप अपना मार्ग विवेक से निर्धारित करे तो आप निश्चय ही सफल हो सकते हैं ।
सुप्रसिद्ध विचारक एवं चरित्र -निर्माण विषय के अधिकारी लेखक स्वेट मार्डेन ने इस तथ्य को उजागर किया

Monday, October 18, 2010

अभय चौटाला लेंगे बैठक

सिरसा/ऐलनाबाद १० अक्तूबर (सुशील/जगदीप/अंकिता) इंडियन नेशनल लोकदल पार्टी की और से ऐलनाबाद के विधायक एवं खेल रत्न अभय सिंह चोटाला अपने निवास स्थान पर १९ अक्तूबर सुबह१० बजे सिरसा हल्के के सभी पदाधिकारी व् कार्यकर्ताओं की मीटिंग लेंगे । इनेलो पार्टी के जिलाध्यक्ष पदम जेन ने बताया की इस मीटिंग का मुख्य उदेश्य पार्टी की और से १ नवम्बर से हो रही गुडगाँव रेली को सफल बनाने के लिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को लेकर आने के ल्लिये कहेंगे । जेन ने लोगों को कहाकी आज का यह त्यौहार धर्म की अधर्म पर जीत का प्रतीक है । उन्होंने आगे कहा की हरियाणा के खिलाडियों ने कोमनवेल्थ खेलों में जो अच्छा प्रदर्शन किया है वे बधाई के पात्र है ।

Monday, October 11, 2010

गरीबों का काल है कोम्न्वेल्थ खेल

खेलों का आयोजन करवाना कोई बुरी बात भी नहीं है क्योंकि खेल रास्ट्रीयभावना और प्रेम प्यार कि भावना को मजबूत करते है लेकिन यदि गरीबों कि दुर्दशा या महंगाई को देखा जाये तो यह उनके लिए एक अभिशाप बन जायेगा । कोमनवेल्थ खेलों का आयोजन करने वालों के घरों में चाहे बेअंदाज पैसा आ जाये लेकिन उन गरीब लोगों कि कोन सुनेगा जिन्हें कोमनवेल्थ खेल के चलते दिल्ली में आने तक कि अनुमति नहीं है इस हाल को देखकर तो मुझे एक शायर कि लाइन याद आ रही है ......
"लोग चढ़ा रहे है मजारों पर चादरें ,
लेकिन किसे खबर कि कोई बेकफन भी हैं" ।
भारत मुनियों और धर्म कि भूमि माना जाता है जहाँ यह सत्य कहते है कि हमें अपनी हेसियत और ओकात में रहकर खर्च करना चाहिए या कि चादर देखकर पैर पसारना चाहिए । तो भारत में कोमनवेल्थ खेलों को आयोजित करने में जितना पैसा बहाया जा रहा है क्या उससे आम आदमी को एक रूपए का भी फायदा हुआ है ?क्या कोई यह प्रावधान है कि कोई एक भी गरीब आदमी उस खेल को देखने कि विशेष छुट मिली है ?.........लेकिन उनके लिए एक तोहफा जरुर दिया गया है , महंगाई का वो फंदा जो कुछ दिन पहले बसों का किराया बढाकर उनके गले में डाला गया था ।
५० करोड़ का वो गुबारा जिसके पैसों को यदि रोडवेज विभाग को दिया होता तो शायद इस परेशानी से तो नहीं जूझना होता । और यदि इन पैसों को शिक्षा विभाग या खेल नर्सरियों को तेयार करने में लगाया जाता तो आने वाले समय में जब भी विश्व में खेल होते तो भारत का स्वर्ण , रजत और कांस्य पदक विजेताओं में पहला स्थान होता ।